कौन से वैक्सीन लगवाएं ? Corona Virus News | वैक्सीन के बाद संक्रमण का चांस ?  सभी को वैक्सीन क्यों नहीं | दूसरे डोज में इतना गैप क्यों ? Covid-19, Vaccine, Immune System, संक्रमण

कोरोनावायरस को SARS-COV-2 भी कहते हैं, और इससे होने वाली बीमारी को कोरोनावायरस डिजीज अर्थात कोविड-19 भी कहते हैं। भारत में कोरोनावायरस का संक्रमण बहुत तेजी से फैल रहा है।  इन दिनों करोना महामारी दिन प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही है। इसलिए भारत में इसकी वैक्सीन की डिमांड बहुत अधिक हो गई है। इन दिनों भारत में 1 दिन में कोरोना संक्रमित व्यक्तियों की संख्या पौने दो लाख के करीब रहता है। और कोरोना संक्रमण का रफ्तार और बढ़ ही रहा है। इसलिए हमें सतर्क रहने की बहुत आवश्यकता है। corona Virus News

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भारत में अब एक और वैक्सीन की मंजूरी दी गई है। अब भारत में कुल तीन वैक्सीन की मंजूरी हो गई है। 1. Covishield vaccine 2. co vaccine 3. Sputnik v corona Virus News

1. कोवैक्सीन (co vaccine)

यह वैक्सीन भारत में ही बन रही है इसका उत्पादन हैदराबाद में भारत बायोटेक कंपनी के द्वारा बनाई जा रही है। बायोटेक कंपनी 1 महीने में कोवैक्सीन की 50 लाख डोज तैयार कर रही है। कोवैक्सीन का एफीकेसी रेट 81% है । इस वैक्सीन का 2 डोज का कीमत लगभग ₹500 है।

2. कोविशील्ड (Covishield)

यह वैक्सीन भी भारत में ही उत्पाद की जा रही है।
अभी इसका उत्पादन पुणे में ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और एक्स्ट्रा जनिका के द्वारा की जा रही है। भारत कोभीशिल्ड का 1 महीने में 7 से 10 करोड़ डोज का उत्पादन कर रही है। कोभीशिल्ड का एफीकेसी रेट 79% है। इस वैक्सीन की भी 2 डोज का कीमत लगभग ₹500 ही है।

इन दोनों वैक्सीन को सरकारी हॉस्पिटलों में फ्री में लगाई जा रही है और अगर किसी व्यक्ति को आप प्राइवेट हॉस्पिटल में लगाते हैं तो एक डोज की ढाई सौ रुपए चुकाने पड़ेंगे।

3. स्पूतनिक वी (Sputnik v)

रशिया की एक कंपनी द्वारा बनाई जा रही है।
इस वैक्सीन का एफीकेसी रेट 91.6% है।
भारत से पहले कई देश इस वैक्सीन को  लगाने की मंजूरी दे चुकी है। इस वैक्सीन का साइड इफेक्ट लोगों पर बहुत कम दिखा है दुसरे वैक्सीन के मुकाबले।
स्पूतनिक वी (Sputnik v) को 2 से 8 डिग्री सेल्सियस पर रखनी होती है। स्पूतनिक वी की 2 डोज की कीमत लगभग ₹750 है। स्पूतनिक वी की दूसरी डोज का अंतर 21 दिनों का रहता है।

एफीकेसी रेट क्या होता है ? Effectiveness

किसी भी वैक्सीन का एफीकेसी रेट उस पर निर्भर करता है कि उस वैक्सीन का ट्रायल के दौरान उससे कितने लोग ठीक हुए हैं।

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वैक्सीन के दूसरे डोज में इतना गैप क्यों?

वैक्सीन कोई इलाज नहीं है यह एक बचाव है जो हमें करोना से बचाती है। भारत में कोरोना के पहले वैक्सीन लगाने के कुछ हफ्तों बाद दूसरी डोज दी जाती है। ऐसा इसलिए क्योंकि वैक्सीन के पहले डोज मैं  रिएक्शन धीरे-धीरे शरीर में काम करना शुरू करता है इसके दौरान थोड़े साइड इफेक्ट भी होते हैं। जब वैक्सीन की पहली डोज लगती है तो शरीर को एंटीबॉडी( Antibody) बनाने में कुछ समय लगता है। और दूसरी डोज में  रियेक्ट करना शुरू कर देता है। पहले डोज में  आपको कोरोनावायरस का खतरा बना ही रहता है।

भारत में वैक्सीन की डिमांड और सप्लाई | corona Virus News  Demand And Supply

भारत में वैक्सीन की कुल डिमांड 10.5 करोड़ के करीब है। यानी भारत को हर महीने साढे दस करोड़ वैक्सीन की जरूरत है। लेकिन यहां लगभग 7 करोड फैक्सीन ही बना पा रहा है।
तो भारत में कम से कम तीन करोड़ वैक्सीन की कमी हो रही है। इस 3 करोड़ वैक्सीन की कमी को पूरा करने के लिए स्पूतनिक वी वैक्सीन की जरूरत है।

भारत में वैक्सीन की डिमांड बहुत है परंतु उसकी सप्लाई उतनी अधिक नहीं है। वैक्सीन की कमी के वजह से भारत के कई राज्यों में वैक्सीन देने की प्रक्रिया को फिलहाल रोक दिया गया है।

भारत में कोरोनावायरस से ज्यादा खतरा बुजुर्गों को माना जा रहा है लेकिन अभी के आंकड़ों के अनुसार यह गलत साबित होते जा रहा है क्योंकि भारत में जो लोग कोरोनावायरस संक्रमण हो रहे हैं उनमें से ज्यादा की उम्र 45 साल से कम है। और ऐसा भारत के अलावा अन्य देशों में भी है। इसका कारण युवाओं द्वारा बाहर जाकर रोजमर्रा का काम और नौकरी भी हो सकता है। अगर आप सोच रहे हो कि मेरी उम्र भी ज्यादा नहीं है और मैं बहुत फिट हूं मुझे कोरोना से डरने की जरूरत नहीं है तो यह गलत भी साबित हो सकती है।

 

सभी को वैक्सीन क्यों नहीं लग रही है ? corona Virus News

भारत में अभी coronavirus vaccine सभी को नहीं दी जा रही है। इसके कई कारण हैं।
भारत में पहले के आंकड़ा के अनुसार 45 साल से ऊपर को कोरोना का ज्यादा खतरा माना गया। इसलिए इन्हें ही अभी इसकी डोस दी जा रही है। सभी को एक सी नहीं देने का सबसे बड़ा कारण भारत का जनसंख्या भी है। भारत में अगर युवाओं को भी वैक्सीन देनी शुरू हो जाए तो इसके चलते कई बुजुर्ग को वैक्सीन की कमी हो जाएगी क्योंकि वैक्सीन का सप्लाई बहुत कम है।

coronavirus का जन्म | corona Virus News

कोरोनावायरस को SARS-COV-2 भी कहते हैं, और इससे होने वाली बीमारी को कोरोनावायरस डिजीज(Coronavirus Disease) अर्थात कोविड-19 भी कहते हैं।
कोरोनावायरस शुरू हुआ था 2019 के दिसंबर महीने में।
इसकी शुरुआत चाइना के वुहान सहर से हुई। साइंटिस्ट के अनुसार यह वायरस चमगादर से ही निकला है। और कई साइंटिस्ट का कहना है कि यह अलग-अलग चीजों से मिलकर बना है। लेकिन अभी तक इसका  100% कंफर्म नहीं है कि यह वायरस किस चीज से निकली है। जब इस वायरस की शुरुआत हुई थी तो चाइना के डॉक्टर ‘ली’ को इसकी भनक लगी थी, और यह डॉक्टर सभी को यह चेतावनी देने लगे और इस बात को फैलाने लगे, उसके बाद वहां के गवर्नमेंट डॉक्टर को अरेस्ट कर लिए अफवाह फैलाने के जुर्म में। फिर बाद में पता चला है कि यह वायरस सही में है और 11 मार्च 2020 को WHO (world health organisation) ने इसे महामारी घोषित कर दिया।

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वैक्सीन के बाद संक्रमण का चांस।

आपको बता दें कि कोरोनावायरस का वैक्सीन के पहले डोज लेने के बाद भी कोरोना संक्रमण का खतरा बना रहता है हालांकि वैक्सीन से पहले के मुताबिक थोड़ा कम रहता है। वैक्सीन करोना का इलाज नहीं है बल्कि कोरोना से बचाव करती है। कई लोग यह सोचते होंगे कि वैक्सीन के बाद भी कोरोना का खतरा रहता है तो वैक्सीन क्यों लगाए, तो आपको बता दें कि वैक्सीन लगाने से पहले करोना का जितना खतरा रहता है उससे कई गुना कम हो जाता है वैक्सीन लगाने के बाद कोरोना का खतरा और वैक्सीन की दूसरी डोज के बाद  खतरा कम हो जाता है। वैक्सीन के बाद आपको करोना के मामूली लक्षण ही आएंगे। इसलिए आप लोग कोरोना वैक्सीन का दोनों डोज जरूर ही ले। corona Virus News

वैक्सीन का मिक्चर।

भारत में 3 वैक्सीन का अप्रूवल मिल गया है।
ऐसे में कई व्यक्तियों के मन में यह सवाल आता होगा कि पहली डोज में कोवैक्सीन लगाएं और दूसरी डोज में कोई और वैक्सीन।
तो आपको बता दें कि भारत में ऐसा करने का मंजूरी नहीं दी गई है। हालांकि अन्य देश में इसकी प्रयोग किया जा रहा है। यूके में इसका एक्सपेरिमेंट किया जा रहा है।

Immune System कैसे काम करता है ? रोग प्रतिरोधक क्षमता

रोग प्रतिरोधक क्षमता, इसे आप अपने शरीर के सोल्जर (soldier) भी कर सकते हैं।
जब बैक्टीरिया या वायरस आपके शरीर के अंदर जाता है तो आपके शरीर के ही सोर्सेस को यूज करके वह समय-समय पर डबल होते जाता है और इसकी संख्या बढ़ती जाती है। इसकी संख्या ज्यादा बढ़ने के बाद आपके शरीर के माइक्रोफेसेज (Macrophages) और न्यूट्रोफाइल्स (Neutrophils) मिलकर बैक्टीरियाज से लड़ने के लिए आगे आते हैं जिसमें पानी की खपत भी होती है, और इस दौरान शरीर अपना तापमान बढ़ाने लगती है। जिसे फीवर भी कहते हैं। ऐसे ही काम करता है इम्यून सिस्टम। और अगर जिसका यह सब काम ठीक तरीका से नहीं होता है, अर्थात इम्यून सिस्टम कमजोर होता है तो उन्हें ही वायरस और बैक्टीरिया से हानि पहुंचती है।

Immune_System

इम्यूनिटी पावर कैसे बढ़ाए।

इम्यून सिस्टम बढ़ाने के लिए आप धूप के सामने आ सकते हैं, पोलूशन से दूर रहे, स्ट्रेस को कम लें, नकारात्मक चीजों से दूर रहे, पेड़ पौधों के करीब रहे, फल और हरी सब्जियां ज्यादा खाएं, खट्टे फल खाए, एक्सरसाइज करें, और हमेशा अंदर से खुश रहें।

 


infections | संक्रमण

इंफेक्शन दो प्रकार के होते हैं। एक बैक्टीरियल इनफेक्शन और दूसरा वायरल इनफेक्शन।
बैक्टीरियल इंफेक्शन के अंतर्गत गला का खांसी, कान में कुछ प्रॉब्लम होना इत्यादि आता है। जबकि वायरल इनफेक्शन के अंतर्गत इन्फ्लूएंजा, चिकन पॉक्स, एचआईवी, कोरोनावायरस इत्यादि आते हैं। बैक्टीरिया से होने वाली बीमारी का दवा से ठीक हो सकता है, एंटीबायोटिक के द्वारा। लेकिन वायरस से होने वाले बीमारी का एक बार में ही पूरी तरह से ठीक नहीं कर सकते बल्कि रोकथाम और बचाव कर सकते हैं। सर्दी भी वायरल इंफेक्शन के अंतर्गत आता है जिसका आज तक कोई इलाज नहीं निकल पाया जिससे 100% एक बार में ठीक हो जाए।

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कोरोना वायरस का अभी का पूरा डाटा  

कोरोनावायरस से कैसे बचे ?

कोरोनावायरस से बचने के लिए आप अपने शरीर के इम्यून सिस्टम को तेज करें, सोशल डिस्टेंसिंग बनाकर रखें और हमेशा कुछ समय अंतराल पर अपने हाथ को साबुन से जरूर धोए।

कहावत में यह कहा गया है कि किसी व्यक्ति की उसकी पुंजी का अंदाजा लगाने के लिए उसकी मृत्यु के बाद झुकने वाले भीड़ से लगाया जा सकता है। परंतु करो ना के केस में यह भी अब मुमकिन नहीं है क्योंकि कोरोना से मरने वाले मरीज के अंतिम संस्कार में भीड़ नहीं जुट पाती है।

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posted by – Rohit kumar 

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कोरोनावायरस से कैसे बचे ?

कोरोनावायरस से बचने के लिए आप अपने शरीर के इम्यून सिस्टम को तेज करें, सोशल डिस्टेंसिंग बनाकर रखें और हमेशा कुछ समय अंतराल पर अपने हाथ को साबुन से जरूर धोए।

Immune System कैसे काम करता है ?

रोग प्रतिरोधक क्षमता, इसे आप अपने शरीर के सोल्जर (soldier) भी कर सकते हैं।
जब बैक्टीरिया या वायरस आपके शरीर के अंदर जाता है तो आपके शरीर के ही सोर्सेस को यूज करके वह समय-समय पर डबल होते जाता है और इसकी संख्या बढ़ती जाती है। इसकी संख्या ज्यादा बढ़ने के बाद आपके शरीर के माइक्रोफेसेज (Macrophages) और न्यूट्रोफाइल्स (Neutrophils) मिलकर बैक्टीरियाज से लड़ने के लिए आगे आते हैं जिसमें पानी की खपत भी होती है, और इस दौरान शरीर अपना तापमान बढ़ाने लगती है। जिसे फीवर भी कहते हैं। ऐसे ही काम करता है इम्यून सिस्टम। और अगर जिसका यह सब काम ठीक तरीका से नहीं होता है, अर्थात इम्यून सिस्टम कमजोर होता है तो उन्हें ही वायरस और बैक्टीरिया से हानि पहुंचती है।

सभी को वैक्सीन क्यों नहीं लग रही है ? 

भारत में अभी कोरोनावायरस का वैक्सीन सभी को नहीं दी जा रही है। इसके कई कारण हैं।
भारत में पहले के आंकड़ा के अनुसार 45 साल से ऊपर को कोरोना का ज्यादा खतरा माना गया। इसलिए इन्हें ही अभी इसकी डोस दी जा रही है। सभी को एक सी नहीं देने का सबसे बड़ा कारण भारत का जनसंख्या भी है। भारत में अगर युवाओं को भी वैक्सीन देनी शुरू हो जाए तो इसके चलते कई बुजुर्ग को वैक्सीन की कमी हो जाएगी क्योंकि वैक्सीन का सप्लाई बहुत कम है।

वैक्सीन के दूसरे डोज में इतना गैप क्यों?

वैक्सीन कोई इलाज नहीं है यह एक बचाव है जो हमें करोना से बचाती है। भारत में कोरोना के पहले वैक्सीन लगाने के कुछ हफ्तों बाद दूसरी डोज दी जाती है। ऐसा इसलिए क्योंकि वैक्सीन के पहले डोज मैं  रिएक्शन धीरे-धीरे शरीर में काम करना शुरू करता है इसके दौरान थोड़े साइड इफेक्ट भी होते हैं। जब वैक्सीन की पहली डोज लगती है तो शरीर को एंटीबॉडी( Antibody) बनाने में कुछ समय लगता है। और दूसरी डोज में  रियेक्ट करना शुरू कर देता है। पहले डोज में  आपको कोरोनावायरस का खतरा बना ही रहता है।

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