भारत की शिक्षा व्यवस्था | Coaching का धंधा, tuition Industry | इंटरनेट से शिक्षा | Online Study | What is Success ?

Education System Of India-  बच्चे आजकल 4 वर्ष की छोटी उम्र से ही पढ़ाई का बोझ उठाना शुरू कर देते हैं और ट्यूशन जाना स्टार्ट कर देते हैं। बच्चे को शुरू से ही ट्यूशन के आदत पड़ जाती है, और बच्चे आठवीं से दसवीं तक जाते-जाते अलग-अलग सब्जेक्ट के tuition को पकड़ना शुरू कर देते हैं और यहीं से ट्यूशन जैसे उद्योग का विकास होता है।

भारत में tuition, Institute का महत्व | Importance OF Coaching

शिक्षा के क्षेत्र की एक बहुत बड़ी कंपनी Byju’s ने आकाश इंस्टिट्यूट(Aakash Institute) को खरीद लिया है सूत्रों से पता चला है कि Byju’s ने आकाश इंस्टिट्यूट को 7300 करोड़ रुपए में  खरीदा है। एक कोचिंग चलाने वाली कंपनी की कीमत इतना ज्यादा है यह एक आश्चर्य की बात है।

आज भारत में बिना ट्यूशन के अच्छी शिक्षा की कल्पना नहीं की जा रही है। बिना ट्यूशन के आप अपने अच्छे भविष्य की कल्पना भी नहीं कर पा रहे हैं। आजकल शिक्षा व्यवस्था का संस्कृति, कोचिंग ट्यूशन के कल्चर में बदल गया है।
आज के दौर में अगर छात्र ट्यूशन इंस्टिट्यूट से पढ़ाई नहीं करते हैं तो उनका पढ़ाई डिग्री मात्र के लिए ही माना जाता है और इसी का फायदा उठाकर ट्यूशन इंस्टिट्यूट जैसे उद्योग बहुत बड़े हो चुके हैं। भारत में हर 4 में से 1 छात्र कोचिंग पर निर्भर रहते है। एक बच्चा महीने में 36 घंटा से ज्यादा समय कोचिंग में बिता देते हैं। भारत में सबसे ज्यादा प्राइवेट कोचिंग संस्थान पढ़ाई करने वाले छात्रों की संख्या पश्चिम बंगाल में है। पश्चिम बंगाल में लगभग 90% छात्र कोचिंग पर  निर्भर होकर पढ़ाई करते हैं। और बिहार में लगभग 68% छात्र प्राइवेट कोचिंग में पढ़ाई करते हैं। एक आंकड़ा से यह मालूम किया गया है की अगर छात्र से पूछा जाए कि कोचिंग और विद्यालय दोनों में से किस में अच्छी शिक्षा दी जाती है तो विद्यार्थी का आंसर कोचिंग ही होता है।

पहले की सिक्षा और अब की सिक्षा

आज से 15 20 साल पहले शिक्षा का मात्र एक ही केंद्र होता था और वह विद्यालय था। उस समय छात्र स्कूल में ही पढ़ाई करते थे और स्कूल से लौटने के बाद घर पर यह होमवर्क करते थे। लेकिन आजकल ऐसा नहीं है। पहले के कल्चर में ट्यूशन कोचिंग जैसी संस्थाएं समाज के लिए अच्छा नहीं माना जाता था ट्यूशन पढ़ाने वाले टीचर को समाज में अच्छी सम्मान नहीं मिलती थी। गांव समाज में आसपास के लोग टीचर को सही नहीं बोला जाता था जो ट्यूशन पढ़ाते थे। परंतु समय बदलता गया और लोगों की सोच भी बदलती गई और आज ट्यूशन संस्थान बहुत तेजी से आगे बढ़ चुकी है। और आज आप अगर ट्यूशन नहीं पढ़ रहे हैं तो आपका भविष्य कम उज्जवल है। Education system of india

क्यों विद्यार्थी कोचिंग में ही पढ़ना पसंद करते हैं? Why Do Student Like To Study In Coaching ? 

अच्छी स्थिति में अगर विद्यार्थियों को स्कूल में पढ़ाया जाए तो एक शिक्षक पर 30 विद्यार्थी होना चाहिए परंतु होता इसके विपरीत है और 60 विद्यार्थी को पढ़ाना पड़ता है। जिससे विद्यार्थियों के कई डाउट क्लियर नहीं हो पाते हैं और वह भीड़ में सही से पढ़ाई नहीं कर पाते हैं। जबकि ट्यूशन में हर एक विद्यार्थी पर अच्छे से ध्यान दिया जाता है और डाउट भी क्लियर करा जाता है। इसमें स्कूल की व्यवस्था की भी गलती है भारत में 17% शिक्षक का पद खाली पड़ा हुआ है। यानी हमारे देश में 10 लाख से भी ज्यादा शिक्षकों के पद खाली है। शिक्षक के व्यवहार के वजह से भी छात्र कई बार ट्यूशन का ही चयन करते हैं। अधिकतम सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों का चेहरा थोड़ा गुस्सा में  रहता है और हाव-भाव थोड़ा गंभीर रहता है, जबकि ट्यूशन में शिक्षकों का बोली वचन मीठा होता है, जैसे कि एक विक्रेता का होता है। और यही कारण है की छात्र विद्यालयों के कंपेयर में ट्यूशन में पढ़ना ज्यादा पसंद करते हैं।

भारत में स्कूल और कॉलेजों की संख्या

भारत में कुल स्कूलों की संख्या लगभग 15 लाख है जिसमें सरकारी और प्राइवेट दोनों स्कूल में मिलाकर है। प्ले स्कूल की संख्या 33000 से भी ज्यादा है। और 1000 से ज्यादा यूनिवर्सिटीज है

पढाई पे होने वाली खर्चा /  Cost Of Study

भारत में एवरेज तौर पर एक विषय को पढ़ाने के लिए महीने की फीस 400 से 700 के बीच है। बच्चों के मां-बाप बच्चे को अच्छे भविष्य देने के लिए या फिस झुकाते हैं। भारत में औसतन गार्जियन के कमाई का 12% हिस्सा बच्चों की शिक्षा में जाता है। और इसके बावजूद भी हायर एजुकेशन के लिए इससे कई गुना ज्यादा रुपए का फीस चुकाना पड़ता है। कई मामलों में तो ऐसा भी हो जाता है कि स्टूडेंट आगे चलकर नौकरी में जितना कम आएंगे उससे ज्यादा अपनी शिक्षा में फीस के तौर पर खर्च कर चुके रहते हैं।

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ट्यूशन उद्योग में खर्चा 

ट्यूशन उद्योग का बात करें तो भारत में ट्यूशन फीस का सलाना इनकम 25000 करोड रुपए हो गया है। मैट्रिक और इंटर के बाद और कोई विद्यार्थी मेडिकल या इंजीनियरिंग का पढ़ाई करता है तो उसे सालाना डेढ़ लाख से ज्यादा पैसा खर्चा करना पड़ता है। और अगर छात्र कोई बड़ा इंस्टिट्यूट में रह कर पढ़ाई करें दूर से सालाना ₹3 लाख से भी ज्यादा खर्च करना पड़ता है। कई गरीब विद्यार्थियों के माता-पिता तो उनके उज्जवल भविष्य के लिए अपने पुश्तैनी जमीन भी बेच देते हैं जो कि एक दुर्भाग्य की बात है। Education system of india

आजकल की शिक्षा व्यवस्था / Today’s Education System / Education System of India

आजकल की शिक्षा व्यवस्था का मतलब यह हो गया है कि रट रटकर पढ़ाई करो परीक्षा दो और डिग्री पाओ, और यही रिपीट होता रहता है आजकल की एजुकेशन सिस्टम में बच्चे चीज की तरह मैन्युफैक्चर हो रहे हैं। एक रोबोटिक सिस्टम की तरह। आजकल का एजुकेशन सिस्टम टैलेंट का वैल्यू बहुत कम करते हैं और डिग्री का वैल्यू ज्यादा अर्थात क्रिएटिविटी का वैल्यू धीरे-धीरे घटता जा रहा है शिक्षा के क्षेत्र में। दुनिया में हर इंसान का एक अलग अलग खूबी होता है जिसमें वह व्यक्ति माहिर होते हैं आपको एक उदाहरण से समझाएं तो अगर मछली को पेड़ पर चढ़ने का परीक्षा लिया जाए तो यह बेवकूफी है क्योंकि मछली का टैलेंट तैरने में है। अर्थात इससे यह साबित होता है कि छात्र को उसकी क्षेत्र में ही शिक्षा दी जाए और उसमें ही टेस्ट लिया जाए।

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मसीन के तरह पढाई / Robotic Education System

पढ़ाय  ➡️  रटाय  ➡️  याद  कराना  ➡️  टेस्ट  ➡️  फिर पढ़ाय

स्कूली शिक्षा आपको पहले पढ़ाया जाता है, फिर रटाया जाता है, और उसके बाद उसको याद करने को कहा जाता है, फिर कई दिनों बाद आपका टेस्ट  लिया जाता है, इस टेस्ट में स्टूडेंट के इंटेलिजेंस का टेस्ट नहीं होता है बल्कि रटने का टेस्ट लिया जाता है। इसी के चलते कई टॉपर सर ऊंचा करके चलते हैं। लेकिन यह सिर्फ याद करने का ही टेस्ट रहता है। 
मेरा छात्र से यही कहना है की आपका जिस चीज में टैलेंट है उसी पर ध्यान दो और उसी पर मेहनत करो और उसी पर टाइम दो ताकि सक्सेस आपको खुद ब खुद ढूंढ ले।

New Education Policy. भारत की नई शिक्षा नीति / Education system of india

भारत में शुरू से चल रहा शिक्षा नीति को थोड़ा सा मॉडिफाई किया गया है, भारत की शिक्षा नीति में कुछ इस तरह के बदलाव किए गए हैं।

Child_Education
1. भारत में 3 से 8 साल के बच्चे को भाषा के बारे में और शिक्षण के विकास के बारे में लिखा जाएगा तथा इस पर अच्छा से ध्यान दिया जाएगा।
2. 8 से 11 साल के बच्चे को उसके क्षेत्रीय भाषा में संख्या का ज्ञान और भाषा विकास शिक्षा जाएगा।
3. अब कक्षा 6 से 8 के बच्चे कंप्यूटर कोडिंग (Computer Coding) भी सीखेंगे और इन बच्चों को कोडिंग सिखाया जाएगा तथा व्यवसायिक प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।
4. कक्षा 9 से 12 तक के छात्रों को अपनी मनपसंद सब्जेक्ट लेकर पढ़ाई करने की अनुमति होगी।
नई शिक्षा नीति अपनाने का सबसे बड़ा उद्देश्य भारत का यह है कि छात्रों को सक्षम और टैलेंटेड बनाना। Education system of india

Education_system_of_india
भारत में नई शिक्षा नीति आ जाने से विद्यार्थी के दिमाग के ऊपर पढ़ाई का बोझ थोड़ा कम होने का संभावना है। अर्थात विद्यार्थी रोबोटिक सिस्टम से पढ़ाई से अलग अब क्रिएटिव सिस्टम से भी पढ़ाई कर पाएंगे।  National  Eduacation Policy PDF 

इंटरनेट से शिक्षा | Online Study

जिस तरह आज इंटरनेट का कीमत सस्ता हो गया है, यह छात्रों के लिए वरदान ही माना जाता है क्योंकि इंटरनेट पर हर ऐसे सवाल का जवाब रहता है जिससे छात्र सर्च कर के  जान सकते हैं। और साथ ही मैं यह साफ साफ कहता हूं कि इंटरनेट से पढ़ाई करने पर आप ज्यादा ज्ञान भी ले सकते हैं क्योंकि जो चीज आंखों के सामने देखते हैं उसे याद करने में आसान होता है और साथ ही आप इंटरनेट से अपने इंटरेस्ट के अनुसार ज्ञान लेते हैं इससे आपका कंसंट्रेशन आपके पढाई पे रहता है और आप ज्यादा ज्ञान ले पाते हैं। Education system of india
इंटरनेट पर आपको कई ऐसे वेबसाइट मिल जाएंगे जहां से आप ऑनलाइन कोर्स भी कर सकते हैं। उस कोर्स में आपको अच्छी तरीका से समझा कर बताया गया चाहता है। जैसे की Byju’s

सक्सेस क्या होता है ? / What is Succecss ?

सक्सेस इसका मतलब यह नहीं कि आप पढ़ाई करें और फिर बड़ा होकर कोई जॉब पाले चाहे उस जॉब में आपका दिल लगे या ना लगे। दुनिया के जितने भी बड़े बड़े और महान लोग हैं वह स्कूल आधा पर से ही छोड़ चुके (school dropout) होते  हैं, इसका मतलब यह नहीं है कि आप भी स्कूल छोड़ दें, लेकिन इससे यह साबित होता है की जो लोग अपनी टैलेंट की ओर ध्यान देते हैं और उस पर मेहनत करते हैं तो वह ज्यादा सक्सेस होते हैं। चाहे वह पढ़ाई का ही छेत्र क्यों ना हो।
Succecss का मतलब क्या होता है कि आप जो चीज चाहे या फिर जो आपका बनने का मन है वह आप मेहनत करके बन जाए और यह जरूरी नहीं कि वह पढ़ाई का क्षेत्र ही हो आपका जिस चीज में टैलेंट है उसी में मेहनत करके आप Succecss हो सकते हैं। जॉब पाना भी सक्सेस है अगर आपका टैलेंट उसी में है और उसी की इच्छा रखते हैं आप तो। लोग उसी चीज में Succecss होते हैं जो काम लोग दिल से करते हैं मन लगाकर करते हैं। 

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posted by – Rohit kumar 

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सक्सेस क्या होता है ? / What is Succecss ?

सक्सेस इसका मतलब यह नहीं कि आप पढ़ाई करें और फिर बड़ा होकर कोई जॉब पाले चाहे उस जॉब में आपका दिल लगे या ना लगे। दुनिया के जितने भी बड़े बड़े और महान लोग हैं वह स्कूल आधा पर से ही छोड़ चुके (school dropout) होते  हैं, इसका मतलब यह नहीं है कि आप भी स्कूल छोड़ दें, लेकिन इससे यह साबित होता है की जो लोग अपनी टैलेंट की ओर ध्यान देते हैं और उस पर मेहनत करते हैं तो वह ज्यादा सक्सेस होते हैं। चाहे वह पढ़ाई का ही छेत्र क्यों ना हो।
Succecss का मतलब क्या होता है कि आप जो चीज चाहे या फिर जो आपका बनने का मन है वह आप मेहनत करके बन जाए और यह जरूरी नहीं कि वह पढ़ाई का क्षेत्र ही हो आपका जिस चीज में टैलेंट है उसी में मेहनत करके आप Succecss हो सकते हैं। जॉब पाना भी सक्सेस है अगर आपका टैलेंट उसी में है और उसी की इच्छा रखते हैं आप तो। लोग उसी चीज में Succecss होते हैं जो काम लोग दिल से करते हैं मन लगाकर करते हैं। 

क्यों विद्यार्थी कोचिंग में ही पढ़ना पसंद करते हैं? Why Do Student Like To Study In Coaching ? 

अच्छी स्थिति में अगर विद्यार्थियों को स्कूल में पढ़ाया जाए तो एक शिक्षक पर 30 विद्यार्थी होना चाहिए परंतु होता इसके विपरीत है और 60 विद्यार्थी को पढ़ाना पड़ता है। जिससे विद्यार्थियों के कई डाउट क्लियर नहीं हो पाते हैं और वह भीड़ में सही से पढ़ाई नहीं कर पाते हैं। जबकि ट्यूशन में हर एक विद्यार्थी पर अच्छे से ध्यान दिया जाता है और डाउट भी क्लियर करा जाता है। इसमें स्कूल की व्यवस्था की भी गलती है भारत में 17% शिक्षक का पद खाली पड़ा हुआ है। यानी हमारे देश में 10 लाख से भी ज्यादा शिक्षकों के पद खाली है। शिक्षक के व्यवहार के वजह से भी छात्र कई बार ट्यूशन का ही चयन करते हैं। अधिकतम सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों का चेहरा थोड़ा गुस्सा में  रहता है और हाव-भाव थोड़ा गंभीर रहता है, जबकि ट्यूशन में शिक्षकों का बोली वचन मीठा होता है, जैसे कि एक विक्रेता का होता है। और यही कारण है की छात्र विद्यालयों के कंपेयर में ट्यूशन में पढ़ना ज्यादा पसंद करते हैं।

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