Soil Health Card Yojana, kisan health card

जैसे की हम सब जानते हैं हमारा देश एक कृषि प्रधान देश है, लेकिन हर साल कभी तूफान तो कभी बढ़ के वजह से किसानों का बहुत नुकसान हो जाता है। कभी सुखा पर जाता है, जिसके वजह से फसल को लेके किसानों की कई सारी दीक्कतो का सामना करना पर जाता है। बहुत से किसान बैंको से लोन लेके खेती करते हैं और बाढ़, सुखार, तूफान के वजह से फसल का नुकसान हो जाता है ,जिसके वजह से लोन चुका नही पाते और जिससे किसान आत्महत्या कर लेते हैं। किसानों की परेशानी को देखते हुए उसे दूर करने के लिए –
एक स्कीम Soil Health Card की शुरुआत की गई ।जिसमे किसानों को एक कार्ड बनके दिए जाते हैं। जिसमे किसानों को उनके मिट्टी की छमता उसकी उर्वरता की जांच करके और उनके खेत के बारे में सारी जानकारी दी जाती है।

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Soil Health Card के मध्यम से मिट्टी का जांच करने का तरीका–

  1.  इस योजना में सबसे पहले सॉयल हेल्थ कार्ड की तरफ से अधिकारी आकर आपके खेत की मृदा का सैंपल लेंगे
  2.  उसके बाद अधिकारी उस मिट्टी सैंपल को अपने जांच केंद्र ले जाएंगे और उसकी अच्छी तरह से जांच करेंगे।
  3.  इसके बाद मिट्टी में क्या-क्या कमियां हैं, उसकी एक लिस्ट तैयार करेंगे।
  4.  फिर उनकी सूची बनाएंगे कि इसका क्या क्या समाधान किया जा सकता है, फिर उसका सुझाव देंगे।
  5. जब सारी प्रक्रिया पूरी हो जाएगी तब उस जानकारी को सभी किसानों के नाम से ऑनलाइन पर अपलोड कर दिया जाएगा और फिर किसान उसे आसानी से अपने मोबाइल पर चेक कर सकते हैं।

★Soil Health card scheme की शुरुआत माननीय प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी जी ने 19 feb 2015 को सूरतगढ़ , श्रीनगर (राजस्थान) में किया था।

Soil health card ka slogan/tagline :– स्वस्थ धरा , खेत हरा या health earth, green farmSoil health card (SHC) Government of India के स्कीम हैं। जिसे मिनिस्ट्री ऑफ एग्रीकल्चर और farmers welfare के अंदर में डिपार्टमेंट ऑफ़ एग्रीकल्चरल और co–operation के द्वारा किया जा रहा है। सॉयल हेल्थ कार्ड का एक प्रिंटेड रिपोर्ट होता है, जो कि सॉयल में न्यूट्रिएंट्स के करंट स्टेटस को बताता है। जैसे- फास्फोरस कितना kg हैक्टेयर है। पोटेशियम कितना kg हेक्टेयर है।न्यूट्रिएंट्स के करंट स्टेटस के बेसिस पर फर्टिलाइजर dose recoment की जाती है और सॉयल डिटरमेंट भी की जाति है कौन से furtilizer का कितना डोज देना है।

इस प्रिंटेड रिपोर्ट में 12 पैरामीटर की करंट स्टेटस होते हैं जिनमें तीन माइक्रो न्यूट्रिएंट्स (सोडियम , पोटेशियम , फास्फोरस) , एक सेकंडरी न्यूट्रियंस (सल्फर) , पांच माइक्रो न्यूट्रिएंस (जिंक , फेरस , कॉपर , मैंगनीज , बोरोन) parameter होते हैं। तथा तीन फिजिकल पैरामीटर (ph , ec , oc) भी होते हैं।

सॉयल का जो सैंपल कलेक्ट किया जाता है, अगर एरिया इरिगेटेड एरिया है , तो 2.5 हेक्टेयर में 1 सैंपल कलेक्ट करते हैं , अगर एरिया रेनफेड एरिया ( जहा बारिश कम होती ) है , तो 10 हेक्टेयर लैंड में 1 सैंपल कलेक्ट करते हैं , फिर उस सैंपल को लैब टेस्ट किया जाता है और न्यूट्रिंस का करंट स्टेटस डिटरनमेंट किया जाता है , फिर न्यूट्रिएन के करंट बेसिस पर कौन सा फर्टिलाइजर कितनी मात्रा में चाहिए वो रिकोमेंट किया जाता है।

Soil health card scheme में एक प्रिंटेड रिपोर्ट दिया जाता है , जो सॉयल में न्यूट्रिएंट्स के करंट स्टेटस को बताता है , जिससे पता चलता है कि कौन से न्यूट्रिएंट की कितनी कमी है और कौन सा फर्टिलाइजर कितनी मात्रा में देना पड़ेगा। सॉयल हेल्थ कार्ड पहले 3 साल में एक बार देने के लिए डिसाइड किया था , जो कि 2 साल में एक बार दिया गया।लेकिन अब 2 साल में एक बार सॉयल हेल्थ कार्ड जारी किया जाएगा।
एग्रीकल्चर मिनिस्टर राधामोहन जी का 2015 में एक नोटिस आया था|  जिसमें उन्होंने सॉयल हेल्थ कार्ड स्कीम का पहला साइकल 3 साल के बदले 2 साल में कंप्लीट करने को कहा था। जिसमें पहला साइकल 2015 से 17 तक चला और दूसरा साइकल 2017 से 19 तक चला।

★ 2015 को इंटरनेशनल ईयर ऑफ सॉयल डीक्लियर किया गया था।

  •  soil testing लैब को मजबूत किया जाएगा।
  •  soil fertilizer से जुड़ी जो दिक्कत है हम पर ध्यान दिया जाएगा।
  • फिर सॉइल टेस्ट के बेसीस पर न्यूट्रिएंस मैनेजमेंट प्रैक्टिस कैसे करें इसको प्रमोट किया जाएगा।
  • एक साइकल मैं जो टोटल नंबर ऑफ सैंपल कलेक्ट करने होते हैं उनकी संख्या–235 लाख होती है।

सॉयल हेल्थ कार्ड में होता है क्या है??

सोयल हेल्थ कार्ड में ph , electrical conductivity , organic carbon की मात्रा लिखी होती है।
• बात करते हैं इस स्कीम की बजट की–तो एक साइकल में इसका बजट अधिकतम ₹568 करोड़ है। ईयर वाइज बात करे तो , इसका बजट
2015–2016 में ₹219.47 करोड़ और
2016–2017 में ₹215.77 करोड़ था।मतलब टोटल इसका बजट ₹568.54 करोड़।
जिसमें गवर्नमेंट ऑफ इंडिया का ₹426.41करोड़ शेयर है , और स्टेट का ₹142.13करोड़ शेयर है।
इस स्कीम को improve करने के लिए जो भी cost आएगा वो 75:25 के ratio में सेंट्रल और स्टेट गवर्नमेंट के बीच में शेयर होगा।
इस स्कीम का second phase 1 mai 2017 को शुरू हुआ था , और 2019 तक चला। जिसमें टोटल 120 मिलियन फॉर्म होल्डिंग्स थे।जिनको हेल्थ कार्ड जारी करने थे।पहले साइकल–1 में फिर cycle–2 में।

ईयर वाइज फंड्स की बात करें तो अंडर Soil Health Card में,

2017–2018 में ₹ 15276.87 लाख।
2018–2019 में ₹13454.78 लाख।
Total fund–₹ 51742.20 लाख।

बात करते हैं लेटेस्ट स्टेटस की तो,

Cycle–1 2015 से 17 का कंप्लीट हो चुका है, जिसमें टोटल टारगेट सैंपल को कलेक्ट और उसका टेस्ट करने का था । कलेक्ट और टेस्ट का टोटल सैंपल– 2.53 करोड़, तथा प्रिंट और डिस्पैच करने का टोटल सैंपल– 10.73 करोड़।
Cycle –2 जो 2017 से 2019 तक चला था जिसमे टोटल कलेक्ट और टेस्टिंग सैंपल– 2.73 करोड़ , तथा प्रिंटिंग और डिस्पैच सैंपल– 12.06 करोड़। soil health card yojana

स्टेट वाइज डेटा की बात करें ,

तो साइकल 1 में सबसे ज्यादा U.P( उत्तर प्रदेश) ने हेल्थ कार्ड बनाए हैं ,फिर M.P aur फिर महाराष्ट्र ने सबसे अधिक हेल्थ कार्ड जारी किए हैं।
Cycle–2 में हेल्थ कार्ड जारी करने का सबसे ज्यादा टारगेट UP के लिए है , और UP ने हीं सबसे ज्यादा हेल्थ कार्ड बनाए हैं।
★एग्रीकल्चर मिनिस्टर के द्वारा झज्जर हरियाणा में 5 दिसंबर 2017 को हेल्थ कार्ड मोबाइल एप लॉन्च किया गया था।और 5 दिसंबर को हीं वर्ल्ड सॉयल day मनाया जाता है। soil health card yojana

More important facts–

सबसे ज्यादा फर्टिलाइजर कंजप्शन पंजाब में होता है। सॉयल टेस्टिंग प्रोग्राम सबसे पहले 1955–56 में स्टार्ट किया था , जब 16 सॉयल टेस्टिंग लैबोरेट्री बनाया गया था। जिसके प्रोग्राम का नाम – determination of soil fertility and furtilizer program रखा गया। kisan  soil health card yojana

Soil Health Card के लिए रजिस्ट्रेशन कैसे करें??

सॉयल हेल्थ कार्ड ऑफिशल वेबसाइट के होमपेज पर जाकर लॉगिन करें फिर आपको आपका राज्य सेलेक्ट करना होगा। जैसे ही राज्य पर क्लिक करेंगे तो , आपके सामने न्यू रजिस्ट्रेशन के बटन आएगा। जिसके बाद बटन को क्लिक करने के बाद रजिस्ट्रेशन का पेज खुल जाएगा। जिसमें आपको बैंक डिटेल , यूजर लॉगइन , भाषा , यूजर डिटेल आदि सारी जानकारी सबमिट करनी है। जिससे आपका रजिस्ट्रेशन हो जाएगा , फिर आपको लॉगिन करके होम पेज पर लॉगिन को ओपन करना होगा , लॉगइन फॉर्म में किसान को अपना आईडी नेम और उसके पासवर्ड डालना होगा। जिससे इस प्रकार किसान अपना Soil Health Card बना सकते हैं।

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Posted By – Rohit Kumar

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Soil Health Card में ph , electrical conductivity , organic carbon की मात्रा लिखी होती है।

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